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अस्तित्व का रंग

Posted On: 15 Dec, 2016 में

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“अस्तित्व का रंग”
अस्तित्व का रंग लाल होता है ||
जब गाथा के लाल सुअक्षर होते हैं,
जब पन्नों पर लाल हस्ताक्षर होते हैं,
जब चित्र भूत के संघर्षों का रंग दिखलाते,
कण अतीत के लाल सभी क्षण होते हैं|
अस्तित्व का अरुण भाल होता है,
अस्तित्व का रंग लाल होता है ||
जब शोषण के हाथ कंठ पर अड़ जाते हैं,
जब जीवन पर भार बहुत बढ़ जाते हैं,
जबरन अस्तित्व का अवमूल्यन हो तो,
मुक्ति के आयाम नए गढ़ जाते हैं|
वजूद नया सोनार बंगाल होता है |
अस्तित्व का रंग लाल होता है ||
भरसक अस्तित्व भूख को सहता है,
बेकारी से टूट टूट कर ढहता है,
यंत्रणा के तंत्र मन्त्र से हैं यंत्र उपजते,
तब सृजन का कार्य सिरे से चलता है |
विद्रोह स्वयं कीर्तिमान होता है,
अस्तित्व का रंग लाल होता है ||
सन्दर्भों की जात बदलने से क्या होता है?
मायनों की बात बदलने से क्या होता है ?
अस्तित्व की बारूद फूटकर फैले जब तो,
शीर्षक के परिवेश बदलने से क्या होता है?
अस्तित्व का निबंध लाल होता है,
अस्तित्व का रंग लाल होता है ||

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