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सर्जिकल स्ट्राईक

Posted On: 12 Dec, 2016 में

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सर्जिकल स्ट्राईक मेरी नज़र में
मौक़ा भी है, दस्तूर भी है | सबसे बड़ी बात खुशी | सर्जिकल स्ट्राईक हुई तो ऐसा लगा कि भई ये हमारे मन का हुआ |पूरा देश अपनी नज़र में खुद को ऊंचा उठा पा रहा है | पर सर्जिकल स्ट्राईक, यह जो डिकोड (गूढ़ को सरल करना) डीसाईफर (गुप्त लिपि को आम लिपि में बदलना) होकर हमारे पास पहुँच रहा है, वह है “सर्जिकल स्ट्राईक यानी शल्य प्रहार |” ऐसा प्रहार कि उसने हमको पैने कंकड़ मारकर ज़ख्मी किया बदले में हमने उसको वजनी पत्थर से कुचल दिया | हम एक कुंठित आक्रोश पालने पोसने के लिए तैयार से हैं कि अब यह सिलसिला शुरू ही हो जाए तो अच्छा है, देख ही लेते हैं सामने वाले को |
इस सन्दर्भ में सर्जिकल कहने से हमें औजार ही उपकरण से दिखाई दे रहे हैं और स्ट्राईक कहने से प्रहार (वेलप) का भास हो रहा है | जबकि सर्जिकल का मतलब है सुनिश्चितता के साथ संपादित करना और स्ट्राईक का अर्थ है ढकेलना या धक्का देना या आगे बढ़ाना (पुश ) | सर्जिकल स्ट्राईक यानी सुनिश्चितता के साथ आगे बढ़ाने के लिए ताकत से सरकाना |
जब देश कहता है कि हम तटस्थ हैं तो हम तटस्थ हैं, गुट निरपेक्ष हैं तो हम गुट निरपेक्ष हैं | हम कोई भौगोलिक विस्तार नहीं चाहते पर हमारी भूमि पर किसी का जबरदस्ती कब्जा भी सहन नहीं कर सकते | इस नीति के प्रति समूचा राष्ट्र प्रतिबद्ध, कटिबद्ध, शपथबद्ध है | देश की उत्तरजीविता (फ्युचर सरवाईवल) वारिसाना जीवन्तता (विविडनेस ऑफ सवाईवर्स) के सन्दर्भ में हमारे लिए तटस्थ होने का अर्थ निष्पक्ष होना है, उदासीन (न्यूट्रल) या बेपरवाह होना नहीं तथा निरपेक्ष के मायने गुटबाजी से परे रहना है, पिछलग्गू होना नहीं | संप्रभु राष्ट्र होने की ये अनिवार्य पात्रता (एलिजिबिलिटी) है |
समरस शांत समृद्ध सुखी जीवन प्रत्येक मनुष्य की आशा है एवं जनतंत्र उस आशा को साकार करने की अद्यतन विधि (अपडेटेड मेथड) | एक अकेला आदमी, एक अकेला फ़कीर, एक अकेला योद्धा या एक अकेला बादशाह जनतंत्र का सृजन नहीं कर सकता | सबका एक साथ चलना, जो चलने में असमर्थ हैं उन्हें उठाकर चलना ही जनतंत्र है, पहुँचने पर पता लगे कि कोई छूटा नहीं सभी पहुंचे हैं, यही जनतंत्र की सफलता है | चाहे गए परिणाम न मिलने के कारण योजनाओं का दमदारी से लागू नहीं हो पाना है, जनतंत्र के विचार में किसी कमी की वजह से नहीं | जनतंत्र में लक्ष्य जनतंत्र में विकास की उपलब्धियों पर सभी का हक होता है, जनतंत्र बगैर युद्ध के अमन चैन से रहने का अपूर्व, अनोखा व विलक्षण प्रयोग है, जिसके असफल होने के कोई लक्षण विकास के इस ठौर तक प्रकट नहीं हुए हैं ना कोई ऐसी संभावना सामने आई है |
संविधान के अनुसार भारत प्रजातांत्रिक गणतंत्र है, सबसे बड़े जनतंत्र के रूप में जिसकी वैधता समूचे विश्व ने मान्य की है, स्वीकार की है | आज़ाद होते ही भारत के रूपाकार में हमने दुनिया को वचन देते हुए अपने आप को स्पष्ट किया कि हम ऐसे हैं – प्रजातांत्रिक गणतंत्र | इतिहास गवाह है कि हमारी कथनी और करनी में कभी कोई विसंगति नहीं रही | हमने अपने चरित्र एवं आचरण से दुनिया के शब्द कोष में “डेमोक्रेसी” (जनतंत्र बनाम लोकतंत्र बनाम प्रजातंत्र) और “रिपब्लिक” (गणतंत्र) को एकात्म, समाकलित, अविभाज्य (इन्टीग्रेट) कर दिया | द अस्सेंस ऑफ डेमोक्रेसी एंड रिपबलिक सिंस हेव बीन इंटिग्रेटेड, अमलगमेटेड एंड हारमॅनाईज्ड |
हमारा हमउम्र पडौसी लगातार हमारी नीतियों (सहिष्णुता, सदभाव, सहनशीलता, शान्ति) को कमजोरी, कायरता, निर्बलता, निर्णयहीनता का रंग देकर हमारी अक्षम मुल्क की तस्वीर बनाकर अपनी हीन भावना (इन्फेरियारिटी कॉम्प्लेक्स) को तुष्ट करता रहा | अपनी रेखा को बड़ी करने के बजाय हमारी रेखा को मिटाकर छोटी करने की कोशिश करता रहा, रेखा मिट तो नहीं पाई पर दूर से धुंधली दिखाई देने लगी | इसी धुंधलके के कारण विश्व के तथाकथित चौधरियों के हिदायताना उपदेश यदाकदा सुनाई देने लगे | जन मानस में संसद, मुम्बई तथा काश्मीर फांस की तरह चुभते रहे |
इस सर्जिकल स्ट्राईक ने उस धुंध उस कोहासे को हटाया है, उस चुप्पी को हटाया है, जिसे निर्णयहीनता की तरह पेश किया जा रहा था, जो दरअसल “संवाद से समाधान” के लिए एक जनतांत्रिक देश का गरिमापूर्ण धैर्य था, है और रहना चाहिए | वास्तव में यहाँ धैर्य के घटकों को समझना बहुत बहुत आवश्यक है |
धैर्य कई बार प्रतीक्षा के लिए इस्तेमाल होता है | धैर्य कई बार उतावलेपन पर नियंत्रण के लिये उपयोग में आता है | सरकार और सेना की यह कार्यवाही हताशा की वजह से नहीं है | अब कोई चारा नहीं अब कोई उपाय नहीं, इस सोच का परिणाम नहीं है यह सर्जिकल स्ट्राईक | यह धैर्य वस्तुत: धीरता है जिसके घटक पौरुष, दृढ़ता, साहस, क्षमा एवं शान्ति होते हैं जिसका आधार शक्ति,सामर्थ्य व खुद पर भरोसा होता है | यह काम एंड कूल फोर्टीट्युड है |
एक ही तिथि पर पडौसी और हमारी यात्राएं शुरू हुई हैं | हम खुद को और सामने देखकर चल रहे हैं तभी हमारे यहाँ संस्थाएं और संस्थान, प्रतिभा और प्रयास, भूल और सुधार, आय और अनुमान, कलह और सुलह सारी हलचलों में संतुलन के साथ बढ़त जारी है | पडौसी की निगाह सिर्फ हम पर रही, न खुद पर न आगे | हमसे आगे न निकल सका तो हमारा आगे बढ़ना रोकने में व्यस्त हो गया इस तरह खुद के लिए फुरसत नहीं बची | हमारी बढ़त पहले उसकी ईर्ष्या बनी फिर डर जो अब स्थायी रूप से हीन भावना बन चुकी है |
दुनिया का एकमेव बड़ा लोकतंत्र होने का गौरव हमें हासिल है पर बड़ा होने के साथ क्या यह मजबूत भी है ? अपने लोकतांत्रिक मूल्यों तथा संविधान के प्रति हमारी दृढ़संकल्पता, हमारे समर्पण की परीक्षा की यह घड़ी है |
यह सर्जिकल स्ट्राईक म्यांमार से अलग इसलिए है कि म्यांमार के शीर्ष नेतृत्व के जानकारी व् सहमति से वह कार्यवाही संपन्न हुई थी, साथ ही म्यांमार से हमारे रिश्ते सदभावनापूर्ण हैं |
परन्तु यह पहल अधिकाँश के लिए एक अनूठा,अनोखा (यूनिक) अनुभव इसलिए भी है कि इसमें रोमांच का पुट हमारी कल्पना से भी ज्यादह रहा | सभी ने महसूस किया कि यह रुख और मिज़ाज हमारी विदेश नीति के चेहरे के उलट है और रोमांच की भी यही वजह है | एक फेंटेसी (स्वपनिल) सा मजा, वाह जो सोचा भी न था | एक वोव फेक्टर |
सभी कोनों से सभी माध्यमों से ढेर सारी प्रतिक्रियाएं जारी हैं | यह अत्यंत स्वाभाविक भी है, जिसमें से यह एक आपके सामने भी है | खुशी में आकंठ डूबा होने पर भी कुछ प्रतिक्रियाएं चौंकाती हैं | ऐसा लगता है इस घटना में परपीड़ा से प्राप्त सुख खोजने की चेष्टा है , इसे प्रोत्साहन उन सारी कुरीतियों, संकुचित सोच आधारित मन मुटाव और विभेद को हवा दे सकता है, जिनसे छुटकारा पाकर हम लोकतंत्र की ताक़त बनना चाहते हैं | आतंरिक सुरक्षा को खतरे में डालकर बाहरी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकती | उन्मादी प्रतिक्रियाएं सर्जिकल स्ट्राईक के असर को सीमित कर देगी | उचित होगा कि हम अपनी सेना अपने सुरक्षा बल और अपनी सरकार के साथ खड़े दिखाई दें, ना कि राजनीतिक दलों के साथ |

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